भौतिकी
भौतिकी प्राकृतिक विज्ञान की वह शाखा है जिसमें द्रव्य तथा ऊर्जा और उसकी परस्पर क्रियाओं का अध्ययन किया जाता है।
मात्रक अर्थात यूनिट
मात्रक: किसी राशि के मापन के निर्देश मानक को मात्रक कहा जाता है।
मात्रक दो प्रकार के होते हैं - मूल मात्रक तथा ब्यूत्पन्न मात्रक।
एस आई(SI) पद्धति में मूल मात्रकों की संख्या 7 है, जिसे हम निम्न सारणी में समझ सकते हैं-
- लंबाई - मीटर
- द्रव्यमान - किलोग्राम
- समय - सेकंड
- ताप - केल्विन
- विद्युत धारा - एंपियर
- ज्योति तीव्रता - कैंडेला
- पदार्थ की मात्रा - मोल
इसके अतिरिक्त कुछ संपूरक मूल मात्रक भी होते हैं जैसे-
1. समतल कोण - रेडियन
2. घन कोण - स्टीरेडियन
प्रश्न: व्युत्पन्न मात्रक किसे कहते हैं?
वे सभी मात्रक जो मूल मात्रकों पर उपर्युक्त घात लगाकर प्राप्त किए जाते हैं, व्युत्पन्न मात्रक कहलाते हैं।
जैसे - आयतन का मात्रक = घन मीटर।
प्रश्न: प्रकाश वर्ष किसे कहते हैं?
बहुत लंबी दूरियों की माप करने के लिए प्रकाश वर्ष का प्रयोग किया जाता है।
👉 1 वर्ष में प्रकाश जितनी दूरी तय करता है उसे एक प्रकाश वर्ष कहा जाता है।
हमें ज्ञात है कि प्रकाश 1 सेकंड में 300000 किलोमीटर की दूरी तय करता है।
एक प्रकाश वर्ष बराबर 9.46 X 10^15 मीटर।
प्रश्न: पारसेक क्या होता है?
दूरी मापने की सबसे बड़ी इकाई पारसेक है। एक पारसेक बराबर 3.26 प्रकाश वर्ष।
प्रश्न: अदिश राशि किसे कहते हैं?
अदिश राशि: वैसी भौतिक राशि जिनमें केवल परिमाण होता है दिशा नहीं होती उसे अदिश राशि कहते हैं।
जैसे- द्रव्यमान, चाल, आयतन, कार्य, समय, ऊर्जा आदि।
यह सभी अदिश राशियां हैं।
प्रश्न: सदिश राशि किसे कहते हैं?
सदिश राशि: वैसी भौतिक राशियां जिनमें परिमाण के साथ-साथ दिशा भी रहती है।
जैसे वेग, विस्थापन, बल, त्वरण आदि।
प्रश्न: दूरी किसे कहते हैं?
किसी दिए गए समय अंतराल में वस्तु द्वारा तय किए गए मार्ग की लंबाई को दूरी कहते हैं।
यह एक अदिश राशि है इसे सदैव धनात्मक में लिया जाता है।
प्रश्न: विस्थापन किसे कहते हैं?
विस्थापन : एक निश्चित दिशा में दो बिंदुओं के बीच की लंबवत दूरी को विस्थापन कहते हैं।
यह एक सदिश राशि है इसका मात्रक मीटर होता है।
प्रश्न: चाल किसे कहते हैं?
चाल : किसी वस्तु द्वारा प्रति सेकंड तय की गई दूरी को चाल कहा जाता है। अर्थात चाल = दूरी/समय
चाल का मात्रक मीटर प्रति सेकंड होता है।
प्रश्न: वेग किसे कहा जाता है?
किसी वस्तु के विस्थापन की दर को या एक निश्चित दिशा में प्रति सेकेंड वस्तु द्वारा तय की गई दूरी को वेग कहते हैं। यह एक सदिश राशि है।
प्रश्न: गति किसे कहते हैं?
जब कोई पिण्ड प्रति सेकंड अपनी स्थिति बदलता है तो उसे गति कहते हैं।
प्रश्न: कोणीय वेग किसे कहते हैं?
वृत्ताकार मार्ग पर गतिशील कण को केंद्र से मिलाने वाली रेखा एक सेकंड में जितने कोण से घूम जाती है, उसे उस कण का कोणीय वेग कहते हैं।
v = Ꙍr
प्रश्न: न्यूटन का गति का नियम क्या है?
न्यूटन्स लॉ ऑफ मोशन:
न्यूटन के गति के नियम:
न्यूटन को भौतिकी का पिता माना जाता है इन्होंने 1687 ई0 में अपनी पुस्तक प्रिंसिपिया में सबसे पहले गति के नियम प्रतिपादित किए थे।गति के तीन नियम हैं जो इस प्रकार है-
न्यूटन का गति का प्रथम नियम:
यदि कोई वस्तु विराम अवस्था में है तो वह विराम अवस्था में ही रहेगी यदि वह वस्तु गति की अवस्था में है तो गति की अवस्था में ही रहेगी जब तक कि उस पर कोई वाह्य बल न लगाया जाए।इस नियम को गैलीलियो का नियम तथा जड़त्व का नियम भी कहते हैं।
न्यूटन का गति का द्वितीय नियम:
इस नियम के अनुसार किसी वस्तु के संवेग में परिवर्तन की दर उस वस्तु पर आरोपित बल के समानुपाती होता है तथा संवेग परिवर्तन बल की दिशा में होता है। अब यदि आरोपित बल की दिशा में उत्पन्न त्वरण a एवं वस्तु का द्रव्यमान m हो तो न्यूटन के गति के दूसरे नियम से -F = ma
व्यंजक प्राप्त होता है।
न्यूटन का गति का तृतीय नियम: इस नियम के अनुसार प्रत्येक क्रिया के बराबर किंतु विपरीत दिशा में प्रतिक्रिया अवश्य होती है।
उदाहरण के लिए बंदूक से गोली चलाने पर चलाने वाले को पीछे की ओर धक्का लगता है।दूसरा उदाहरण राकेट को आगे उड़ाने के लिए पीछे गैस तेजी से निकलती है।
तीसरा उदाहरण नाव से किनारे पर कूदने पर नाव को पीछे की ओर हटा देना; इसी नियम पर आधारित है।
प्रश्न: संवेग संरक्षण का सिद्धांत क्या है?
संवेग संरक्षण का सिद्धांत:
यदि कणों के किसी समूह या निकाय पर कोई वाह्य बल नहीं लग रहा हो, तो उस निकाय का कुल संवेग नियत रहता है। अर्थात टक्कर के पहले और बाद का संवेग बराबर होता है।
प्रश्न: उत्तोलक किसे कहते हैं?
उत्तोलक एक सीधी या टेढ़ी मुड़ी हुई छड होती है जो किसी निश्चित बिंदु के चारों ओर स्वतंत्रता पूर्वक घूम सकती है।उत्तोलक में तीन बिंदु होते हैं - आलंब, आयाम तथा भार ।
उत्तोलक के प्रकार:
उत्तोलक तीन प्रकार के होते हैं-
प्रथम श्रेणी का उत्तोलक: इस उत्तोलक में आलंब, आयाम तथा भार के बीच में स्थित होता है। जैसे कैंची, पिलास, कील उखाड़ने की मशीन, शिरीष झूला,साइकिल का ब्रेक, हैंडपंप आदि।
द्वितीय श्रेणी का उत्तोलक: इस वर्ग के उत्तोलक में आलंब तथा आयाम के बीच में भार होता है।
जैसे सरौता, नींबू निचोड़ ने की मशीन, एक पहिए की कूड़ा ढोने वाली गाड़ी।
तृतीय श्रेणी उत्तोलक : इस वर्ग के उत्तोलक में आलम भार के बीच में आया होता है जैसे चिमटा किसान का हल मनुष्य का हाथ आदि।